कनकधारा स्तोत्र की रचयिता श्री शंकराचार्य थे | उन्होंने हिंदू धर्म को व्यवस्थित करने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने हिंदुओं की सभी जातियों को इकट्ठा करके ‘दसनामी संप्रदाय’ बनाया और साधु समाज की अनादिकाल से चली आ रही धारा को पुनर्जीवित किया| कनक का अर्थ है “सोना”|धारा का अर्थ है “बरसना”। तो कनकतरा का अर्थ […]
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दक्षिणामूर्ति हिंदू भगवान शिव का एक अंश है जो सभी प्रकार के ज्ञान के गुरु हैं। परमगुरु के प्रति समर्पित भगवान परमाशिव का यह अंश परम जागरूकता, समझ और ज्ञान के रूप में उनका व्यक्तित्व है। यह रूप शिव को योग, संगीत और ज्ञान के शिक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है, और शास्त्रों पर […]
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लक्ष्मी मंत्र मंत्र का अर्थ होता है एक ऐसी ध्वनी जिससे मन का तारण हो अर्थात मानसिक कल्याण हो जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है ‘मन: तारयति इति मंत्र:’ अर्थात मन को तारने वाली ध्वनि ही मंत्र है। वेदों में शब्दों के संयोजन से इस प्रकार की कल्याणकारी ध्वनियां उत्पन्न की गई। इसी प्रकार […]
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श्री सरस्वती चालीसा ॥दोहा॥ जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥ माता-पिता के चरणों की धूल मस्तक पर धारण करते हुए हे सरस्वती मां, आपकी वंदना करता हूं/करती हूं, हे […]
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श्री बजरंग बाण ॥दोहा॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥ जो भी राम भक्त श्री बजरंग बलि हनुमान के सामने संकल्प लेकर पूरी श्रद्धा व प्रेम से उनसे प्रार्थना करता है श्री हनुमान उनके सभी कार्यों को शुभ करते हैं। ॥चौपाई॥ जय हनुमन्त सन्त हितकारी। […]
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